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कक्षा 9 हिंदी – क्षितिज भाग 1

📖 अध्याय 10: वाख

NCERT समाधान - सभी प्रश्नों के हल हिंदी में। CBSE और RBSE बोर्ड के लिए।

रचनाकार: ललद्यद

प्रश्न अभ्यास (NCERT Textbook Questions)

प्रश्न 1: 'वाख' किस प्रकार की रचना है?
उत्तर: 'वाख' कश्मीरी भाषा में लिखित रचनाएँ हैं, जिन्हें 'वाक्य' या 'वाणी' कहा जाता है। ये ललद्यद द्वारा रचित आध्यात्मिक और भक्ति भाव से परिपूर्ण रचनाएँ हैं, जिनमें आत्म-ज्ञान, ईश्वर-प्राप्ति और सांसारिक मोह से मुक्ति की बात कही गई है।
प्रश्न 2: ललद्यद ने अपने 'वाख' में किस बात पर बल दिया है?
उत्तर: ललद्यद ने अपने 'वाख' में आत्म-ज्ञान और ईश्वर-प्राप्ति पर बल दिया है। उन्होंने बताया है कि ईश्वर को पाने के लिए बाहरी आडंबरों और दिखावों की आवश्यकता नहीं है, बल्कि आंतरिक शुद्धता, सच्ची भक्ति और आत्म-जागृति की आवश्यकता है। उन्होंने सांसारिक मोह-माया को त्यागने और आत्मा को शुद्ध करने की बात कही है।
प्रश्न 3: 'वाख' में ललद्यद ने किस प्रकार के जीवन की ओर संकेत किया है?
उत्तर: 'वाख' में ललद्यद ने सादा, सरल और आध्यात्मिक जीवन की ओर संकेत किया है। उन्होंने बताया है कि मनुष्य को सांसारिक सुख-सुविधाओं और मोह-माया से दूर रहकर आत्म-चिंतन और ईश्वर-भक्ति में लीन होना चाहिए। ऐसा जीवन ही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है।
प्रश्न 4: ललद्यद ने ईश्वर को पाने के लिए किन बातों पर जोर दिया है?
उत्तर: ललद्यद ने ईश्वर को पाने के लिए निम्नलिखित बातों पर जोर दिया है:
  • सच्चे मन से भक्ति करना।
  • आत्म-ज्ञान प्राप्त करना।
  • सांसारिक मोह-माया का त्याग करना।
  • मन को शुद्ध और निर्मल बनाना।
  • अहंकार और दिखावे से दूर रहना।
  • सत्संग और सच्चे गुरु की कृपा प्राप्त करना।
प्रश्न 5: 'वाख' की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: 'वाख' की भाषा-शैली सरल, सहज और भावपूर्ण है। ये रचनाएँ कश्मीरी भाषा में लिखी गई हैं, परंतु इनका भाव सार्वभौमिक है। ललद्यद ने सरल शब्दों में गहरे आध्यात्मिक विचारों को व्यक्त किया है। इनमें उपमा, रूपक और प्रतीकों का सुंदर प्रयोग हुआ है। 'वाख' की शैली में भक्ति, वैराग्य और आत्म-चिंतन की भावना प्रमुख है।
प्रश्न 6: ललद्यद के 'वाख' से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
उत्तर: ललद्यद के 'वाख' से हमें यह शिक्षा मिलती है कि:
  • सच्ची भक्ति और आत्म-ज्ञान से ही ईश्वर को पाया जा सकता है।
  • बाहरी आडंबर और दिखावे से ईश्वर नहीं मिलता।
  • सांसारिक मोह-माया को त्यागकर आत्म-चिंतन करना चाहिए।
  • मन को शुद्ध और निर्मल बनाना चाहिए।
  • अहंकार और दिखावे से दूर रहना चाहिए।
  • सत्संग और सच्चे गुरु की कृपा से ही ईश्वर की प्राप्ति होती है।

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