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कक्षा 9 हिंदी – कृतिका भाग 1

📖 अध्याय 3: रीढ़ की हड्डी

NCERT समाधान - सभी प्रश्नों के हल हिंदी में। CBSE और RBSE बोर्ड के लिए।

लेखक: जगदीशचंद्र माथुर

प्रश्न अभ्यास (NCERT Textbook Questions)

प्रश्न 1: रामस्वरूप और गोपालप्रसाद बात-बात पर "एक हमारा ज़माना था..." कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं। इस प्रकार की तुलना दुकान दक दर्शन तर्कसंगत है?
उत्तर: इस प्रकार की तुलना तर्कसंगत नहीं है क्योंकि दोनों पात्र अपने समय की तुलना वर्तमान से करते हैं लेकिन उनका दृष्टिकोण संकीर्ण है। वे केवल अपने समय की अच्छाइयों को याद करते हैं और वर्तमान की बुराइयों को उजागर करते हैं। वे यह नहीं देखते कि समय के साथ समाज में बदलाव आना स्वाभाविक है। उनकी तुलना पक्षपातपूर्ण है क्योंकि वे अपने समय की कमियों को नज़रअंदाज़ करते हैं। इसलिए यह तुलना तर्कसंगत नहीं कही जा सकती।
प्रश्न 2: रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर: यह विरोधाभास रामस्वरूप की सामाजिक विवशता को उजागर करता है। वे चाहते हैं कि उनकी बेटी उच्च शिक्षित हो, लेकिन समाज में ऐसी लड़कियों के लिए अच्छा रिश्ता मिलना कठिन होता है। इसलिए वे विवाह के समय उमा की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। वे समाज के दोहरे मानदंडों के शिकार हैं — एक ओर वे बेटी को शिक्षित बनाना चाहते हैं, दूसरी ओर समाज के डर से उसकी शिक्षा छिपाने को विवश हैं।
प्रश्न 3: अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, वह उचित क्यों नहीं है?
उत्तर: रामस्वरूप चाहते हैं कि उमा रिश्ता तय करने के समय अपनी शिक्षा और योग्यता छिपाए, साधारण लड़की की तरह व्यवहार करे और लड़के के परिवार को प्रभावित करने के लिए नाटक करे। यह उचित नहीं है क्योंकि यह उमा के आत्म-सम्मान के खिलाफ है। यह उसकी योग्यता और शिक्षा का अपमान है। विवाह में ईमानदारी और सच्चाई होनी चाहिए, छल-कपट नहीं। इस प्रकार का व्यवहार स्त्री को हीन दृष्टि से देखने की मानसिकता को दर्शाता है।
प्रश्न 4: गोपालप्रसाद विवाह को 'बिजनेस' मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं। क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखें।
उत्तर: नहीं, दोनों समान रूप से अपराधी नहीं हैं। गोपालप्रसाद विवाह को व्यापार मानते हैं और अपने बेटे की कमियों को छिपाते हैं, जो अधिक गंभीर अपराध है। वे स्त्री को केवल वस्तु मानते हैं। रामस्वरूप भी अपनी बेटी की शिक्षा छिपाते हैं, लेकिन यह समाज के दबाव में मजबूरीवश है। वे चाहते तो नहीं कि ऐसा करें, लेकिन सामाजिक परिस्थितियाँ उन्हें विवश करती हैं। दोनों के अपराध की मात्रा और प्रकृति अलग-अलग है। गोपालप्रसाद का अपराध स्वार्थ और सोची-समझी साजिश है, जबकि रामस्वरूप का अपराध विवशता और समाज का डर है।
प्रश्न 5: "---आपके लाडले बेटे की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं---" उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
उत्तर: उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता की ओर संकेत करती है। शंकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन जब उमा उससे सवाल पूछती है तो वह अपनी राय नहीं दे पाता। वह अपने पिता के सामने बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। उसकी रीढ़ की हड्डी में दम नहीं है। वह स्वतंत्र रूप से सोचने और निर्णय लेने में असमर्थ है। उमा यह बताना चाहती है कि शंकर में आत्म-सम्मान और आत्मविश्वास की कमी है।
प्रश्न 6: शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की—समाज को कैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: समाज को उमा जैसी लड़की के व्यक्तित्व की आवश्यकता है। उमा शिक्षित है, आत्म-सम्मान रखती है, अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकती है और अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। वह योग्य है और अपनी योग्यता पर गर्व करती है। शंकर जैसे लड़के जो निर्णय नहीं ले सकते, अपनी राय व्यक्त नहीं कर सकते और पिता के सामने झुक जाते हैं, समाज के विकास में सहायक नहीं हो सकते। समाज को ऐसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है जो स्वतंत्र रूप से सोच सकें, निर्णय ले सकें, नैतिक साहस रखें और समानता तथा न्याय के लिए खड़े हो सकें। उमा इन गुणों की प्रतीक है।
प्रश्न 7: 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक की सार्थकता यह है कि यह नैतिक साहस और आत्म-सम्मान का प्रतीक है। जिस प्रकार मनुष्य के शरीर में रीढ़ की हड्डी का महत्वपूर्ण स्थान होता है, उसी प्रकार समाज में नैतिक साहस का विशेष महत्व है। शंकर में यह नैतिक साहस नहीं है, वह अपने पिता के सामने बोल नहीं पाता। उमा में यह साहस है, वह अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है। शीर्षक यह संदेश देता है कि मनुष्य में आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता होनी चाहिए, तभी वह समाज में सम्मान पा सकता है।
प्रश्न 8: कथावस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों?
उत्तर: कथावस्तु के आधार पर मैं निश्चित रूप से एकांकी का मुख्य पात्र उमा को मानता हूँ क्योंकि एकांकी की सारी कथावस्तु उसी के इर्द-गिर्द घूमती है। शंकर पर वह चारित्रिक, शारीरिक और तार्किक कौशल में भारी पड़ती है। उमा उच्च शिक्षित होने के साथ-साथ कला और संगीत में भी निपुण है। एक बार जब उसकी प्रवेश होती है तो वह मंच पर अंत तक बनी रहती है। वह अपनी निपुणता से गोपालप्रसाद और शंकर को निरुत्तर ही नहीं करती, बल्कि उनकी आँखें भी खोल देती है। एकांकी का समापन भी उमा के माध्यम से होता है। अतः उमा एकांकी की मुख्य पात्र है।
प्रश्न 9: एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपालप्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: रामस्वरूप की चारित्रिक विशेषताएँ:
  • वे एक स्वतंत्रता प्रिय व्यक्ति हैं।
  • वे औरतों की शिक्षा के पक्षधर हैं।
  • उन्होंने अपनी पुत्री को भी पुत्र के समान उच्च शिक्षा दिलवाई।
  • वे एक स्नेही पिता हैं।
  • वे अपनी पुत्री की शिक्षा को लेकर गर्वित भी हैं।
  • वे समाज के दबाव में कुछ बातें छिपाने को विवश हैं।
गोपालप्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ:
  • वे एक पुरानी सोच वाले व्यक्ति हैं।
  • वे लड़कियों की उच्च शिक्षा के विरोधी हैं।
  • उनका मानना है कि लड़कियों को केवल मैट्रिक तक ही पढ़ना चाहिए।
  • वे अपने बेटे शंकर के चरित्र के बारे में भी नहीं सोचते।
  • वे विवाह को बिजनेस की तरह देखते हैं।
  • वे स्त्री को वस्तु मात्र मानते हैं।
प्रश्न 10: इस एकांकी का क्या उद्देश्य है? लिखिए।
उत्तर: इस एकांकी का उद्देश्य समाज में व्याप्त कुरीतियों, विशेषकर स्त्री-शिक्षा और विवाह के संबंध में फैली अनुचित मान्यताओं पर प्रहार करना है। यह दिखाता है कि कैसे शिक्षित लड़कियों को भी विवाह के नाम पर समझौता करना पड़ता है और उनकी शिक्षा को छिपाना पड़ता है। यह एकांकी यह संदेश देती है कि विवाह में ईमानदारी, समानता और आपसी सम्मान होना चाहिए। स्त्री और पुरुष दोनों को समान दर्जा मिलना चाहिए। नैतिक साहस और आत्म-सम्मान का होना आवश्यक है। समाज को बदलने के लिए सोच बदलनी होगी।
प्रश्न 11: समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं?
उत्तर: समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने के लिए मैं निम्नलिखित प्रयास कर सकता हूँ:
  • लड़कियों को शिक्षित करने के लिए प्रेरित करना और उनकी शिक्षा में सहयोग देना।
  • घर और समाज में लड़के-लड़कियों के बीच भेदभाव न करना।
  • महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना।
  • दहेज प्रथा, बाल विवाह जैसी कुरीतियों का विरोध करना।
  • महिलाओं को रोजगार के अवसर देने में मदद करना।
  • समाज में महिलाओं के नेतृत्व को स्वीकार करना और सम्मान देना।
  • घर के कामों में महिलाओं की मदद करना और समान जिम्मेदारी बाँटना।
  • अपने आस-पास होने वाले किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना।

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