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कक्षा 9 हिंदी – क्षितिज भाग 1

📖 अध्याय 6: प्रेमचंद के फटे जूते

NCERT समाधान - सभी प्रश्नों के हल हिंदी में। CBSE और RBSE बोर्ड के लिए।

लेखक: हरिशंकर परसाई

प्रश्न अभ्यास (NCERT Textbook Questions)

प्रश्न 1: लेखक ने प्रेमचंद के फटे जूते के बहाने किस पर व्यंग्य किया है और क्यों?
उत्तर: लेखक ने प्रेमचंद के फटे जूते के बहाने उस दकियानूसी सोच पर व्यंग्य किया है जो व्यक्ति के बाहरी रूप-रंग और कपड़ों से उसकी योग्यता और प्रतिष्ठा का मूल्यांकन करती है। समाज में यह धारणा बनी हुई है कि अच्छे कपड़े पहनने वाले ही सम्मानित और सफल होते हैं। लेखक बताता है कि प्रेमचंद जैसे महान् लेखक भी फटे जूतों में घूमते थे, परंतु उनकी प्रतिष्ठा और योग्यता में कोई कमी नहीं थी। इसलिए बाहरी वेशभूषा से किसी को आँकना मूर्खता है .
प्रश्न 2: आपके विचार से लेखक ने यह क्यों कहा कि यह सब तो ठीक है, लेकिन प्रेमचंद को फटे जूते ही पहनने चाहिए?
उत्तर: लेखक ने यह इसलिए कहा क्योंकि फटे जूते प्रेमचंद के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक कृतित्व का अभिन्न हिस्सा थे। प्रेमचंद सादगी और सामान्य जीवन के प्रतीक थे। उनके फटे जूते उनकी उस जीवन-शैली को दर्शाते हैं जो आडंबर और दिखावे से दूर थी। यदि प्रेमचंद नए और चमकदार जूते पहनते तो उनका वह सादगीपूर्ण व्यक्तित्व और गरीबों के प्रति उनका लगाव शायद उतना स्पष्ट न होता। इसलिए लेखक का कहना है कि प्रेमचंद को फटे जूते ही पहनने चाहिए .
प्रश्न 3: पाठ में लेखक ने किस बात पर बल दिया है कि मनुष्य को कैसा होना चाहिए?
उत्तर: पाठ में लेखक ने इस बात पर बल दिया है कि मनुष्य को सादगीपूर्ण और आडंबरहीन जीवन जीना चाहिए। उसे बाहरी दिखावे और कपड़ों से अधिक अपने आंतरिक गुणों और कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। मनुष्य को अपनी योग्यता और चरित्र से सम्मान अर्जित करना चाहिए, न कि बाहरी रूप-रंग से। लेखक का मानना है कि सादा जीवन और उच्च विचार ही मनुष्य की सच्ची पहचान होनी चाहिए .
प्रश्न 4: 'प्रेमचंद के फटे जूते' पाठ में लेखक ने किन-किन मुद्दों को उठाया है?
उत्तर: 'प्रेमचंद के फटे जूते' पाठ में लेखक ने निम्नलिखित मुद्दों को उठाया है:
  • समाज में बाहरी रूप-रंग और कपड़ों के आधार पर व्यक्ति को आँकने की प्रवृत्ति।
  • आडंबर और दिखावे की संस्कृति।
  • सादगी और सादा जीवन का महत्व।
  • प्रेमचंद जैसे महान् व्यक्ति के सादगीपूर्ण जीवन का उदाहरण।
  • सच्ची प्रतिष्ठा और सम्मान योग्यता से मिलता है, न कि वेशभूषा से।
  • हास्य-व्यंग्य के माध्यम से समाज की कुरीतियों पर प्रहार।
प्रश्न 5: प्रेमचंद के फटे जूते और लेखक के नए जूतों के माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर: प्रेमचंद के फटे जूते और लेखक के नए जूतों के माध्यम से लेखक यह संदेश देना चाहता है कि व्यक्ति की पहचान उसके जूतों या कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके कार्यों और चरित्र से होती है। प्रेमचंद फटे जूतों में भी महान् थे क्योंकि उनके कार्य महान् थे। लेखक के नए जूते उसकी योग्यता का प्रमाण नहीं हैं। इसलिए समाज को बाहरी दिखावे से ऊपर उठकर व्यक्ति के आंतरिक गुणों को महत्व देना चाहिए .
प्रश्न 6: 'प्रेमचंद के फटे जूते' पाठ की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: 'प्रेमचंद के फटे जूते' पाठ की भाषा-शैली व्यंग्यात्मक और हास्यपूर्ण है। लेखक ने हरिशंकर परसाई की विशिष्ट शैली में व्यंग्य और विनोद का प्रयोग किया है। भाषा सरल, सहज और बोधगम्य है। लेखक ने आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया है, जिससे पाठ पढ़ने में रोचक और प्रभावी लगता है। व्यंग्य के माध्यम से लेखक ने समाज की कुरीतियों और दिखावे की संस्कृति पर करारा प्रहार किया है। यह शैली पाठ को मनोरंजक और शिक्षाप्रद दोनों बनाती है .

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