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कक्षा 9 हिंदी – क्षितिज भाग 1

📖 अध्याय 9: साखियाँ एवं सबद

NCERT समाधान - सभी प्रश्नों के हल हिंदी में। CBSE और RBSE बोर्ड के लिए।

रचनाकार: कबीर

साखियाँ (Sakhiyan)

प्रश्न 1: 'मानसरोवर' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: 'मानसरोवर' से कवि के दो आशय हैं [citation:1]:
  • तिब्बत में हिमालय की ऊँचाई पर स्थित पवित्र झील, जिसमें हंस क्रीड़ा करते हैं।
  • मनुष्य का पवित्र मन रूपी सरोवर।
प्रश्न 2: कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?
उत्तर: कवि ने सच्चे प्रेमी की कसौटी बताते हुए कहा है कि सच्चा प्रेमी अपने प्रेम अर्थात् ईश्वर की भक्ति करते हुए ईश्वर को पाने का प्रयास करता है। उसे ईश्वर के अलावा किसी सांसारिक वस्तु को पाने की रुचि नहीं होती है। वह लोभ, मोह, माया से ऊपर उठ चुका होता है। उसके लिए सांसारिक आकर्षण तथा बंधन ईश्वर की प्राप्ति में बाधक नहीं बन पाते हैं [citation:1]।
प्रश्न 3: तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है?
उत्तर: तीसरे दोहे में कबीर ने उस आध्यात्मिक ज्ञान को महत्त्व दिया है जो व्यक्ति को अनुभव से प्राप्त होता है [citation:1]।
प्रश्न 4: इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है?
उत्तर: इस संसार में सच्चा संत वही है जो [citation:1]:
  • मोह-माया, लोभ, अपने-पराए की भावना से दूर रहता है।
  • सांसारिक मोहमाया से दूर रहकर प्रभु की सच्ची भक्ति करता है।
  • सुख-दुख, लाभ-हानि, ऊँच-नीच, अच्छा-बुरा आदि को समान रूप से अपनाता है।
  • दिखावे की भक्ति नहीं करता है। वह सच्ची भक्ति से प्रभु को प्राप्त करना चाहता है।
प्रश्न 5: अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है?
उत्तर: अंतिम दो दोहों में कबीर ने जिन संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है, वे हैं [citation:1]:
  • अपने-अपने धर्म को श्रेष्ठ मानने की कट्टरता और दूसरे धर्म की निंदा करना।
  • ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण बड़ा होने का अभिमान करने संबंधी संकीर्णता।
प्रश्न 6: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या उसके कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है। ऊँचे कुल में जन्म लेकर भी व्यक्ति यदि अच्छे कर्म नहीं करता है तो वह सम्मानीय नहीं हो सकता है। इसके विपरीत छोटे या निम्न कुल में भी जन्म लेकर व्यक्ति यदि अच्छे कर्म करता है तो सम्माननीय बन जाता है [citation:1]।
प्रश्न 7: काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 'हस्ती चढ़िए ज्ञान को, सहज दुलीचा डारि। स्वान रूप संसार है, भूकन दे झख मारि।।'
उत्तर:
भाव सौंदर्य: कवि ने ज्ञान की साधना में जुटे लोगों को देखकर संसार की प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति की है। साधक व्यक्ति को देखकर संसार उस पर तरह-तरह की टीका-टिप्पणी करता है [citation:1]।

शिल्प सौंदर्य:
  • मिश्रित शब्दावली का प्रयोग।
  • रूपक अलंकार का प्रयोग - ज्ञान रूपी हाथी, संसार रूपी कुत्ता।
  • 'झख मारि' मुहावरे का सुंदर प्रयोग।

सबद (Sabad)

प्रश्न 8: मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढता फिरता है?
उत्तर: मनुष्य अपने धर्म-संप्रदाय और सोच-विचार के अनुसार ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, काबा, कैलाश जैसे पूजा स्थलों और धार्मिक स्थानों पर खोजता है। वह ईश्वर को बाहर भौतिक स्थानों में ढूँढता फिरता है, जबकि ईश्वर उसके भीतर ही विद्यमान है [citation:5]।
प्रश्न 9: कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?
उत्तर: कबीर ने ईश्वर-प्राप्ति के लिए प्रचलित आडंबरों, बाहरी पूजा-पाठ, मूर्तिपूजा, तीर्थस्थलों की यात्रा और कर्मकांड जैसी प्रथाओं का खंडन किया है। उनका मानना था कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए इन बाहरी दिखावों की नहीं, बल्कि सच्चे मन से भक्ति और सत्य की साधना की आवश्यकता होती है [citation:13]।
प्रश्न 10: कबीर ने ईश्वर को 'सब स्वाँसों की स्वाँस में' क्यों कहा है?
उत्तर: कबीर ने ईश्वर को 'सब स्वाँसों की स्वाँस में' इसलिए कहा है क्योंकि उनका मानना था कि ईश्वर हर व्यक्ति के भीतर निवास करता है। हर सांस के साथ ईश्वर का स्मरण करना और उसे महसूस करना ही सच्ची भक्ति है। ईश्वर कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर ही है [citation:13]।
प्रश्न 11: कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से क्यों की?
उत्तर: कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना आँधी से इसलिए की है क्योंकि ज्ञान का प्रभाव जीवन में बहुत गहरा और व्यापक होता है। जैसे आँधी आते ही सब कुछ बदल देती है, वैसे ही ज्ञान का आगमन भी व्यक्ति के जीवन में गहरा परिवर्तन लाता है। यह व्यक्ति के अज्ञान को मिटाकर उसे सच्चाई की ओर अग्रसर करता है [citation:13]।
प्रश्न 12: ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह आँधी भक्त के जीवन से अज्ञानता, मोह, और माया को हटा देती है और उसे सत्य और ईश्वर की ओर ले जाती है। भक्त का जीवन इस ज्ञान की आँधी के बाद पूरी तरह से बदल जाता है और वह ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाता है [citation:13]।
प्रश्न 13: भाव स्पष्ट कीजिए - 'हित चिंत है धूनी गिरीन्हीं, मोह बलिंडा टूटा।'
उत्तर: इस पंक्ति में कबीर ने यह कहा है कि जब व्यक्ति का मोह और माया के प्रति लगाव समाप्त हो जाता है, तो उसकी चिंताएँ भी खत्म हो जाती हैं। मोह और माया से बंधी धूनी (स्तंभ) के टूटने से हित की चिंता भी समाप्त हो जाती है [citation:13]।

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