पेज 130 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
ध्वनि क्या है?
उत्तर: ध्वनि (Sound) ऊर्जा का एक रूप है जो हमारे कानों में श्रवण संवेदना उत्पन्न करती है ।
ध्वनि एक अनुदैर्ध्य तरंग (Longitudinal Wave) है जो किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) में संचरित होती है ।
प्रश्न 2:
ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: ध्वनि कणों के कंपन (vibrations) के रूप में संचरित होती है ।
- माध्यम के कण आपस में टकराकर ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते हैं ।
- निर्वात (vacuum) में कोई कण नहीं होते, इसलिए ध्वनि निर्वात में नहीं चल सकती है ।
प्रश्न 3:
ध्वनि तरंगें किस प्रकार की होती हैं?
उत्तर: ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) होती हैं ।
- इनमें माध्यम के कण संपीडन (Compression) और विरलन (Rarefaction) बनाते हैं ।
- कण तरंग की दिशा में आगे-पीछे कंपन करते हैं ।
पेज 132 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
ध्वनि का परावर्तन क्या है?
उत्तर: जब ध्वनि तरंगें किसी कठोर सतह से टकराकर वापस लौटती हैं, तो इसे ध्वनि का परावर्तन (Reflection of Sound) कहते हैं ।
उदाहरण: गूँज (Echo) – ध्वनि का परावर्तन ही गूँज का कारण है ।
प्रश्न 2:
गूँज क्या है? इसे सुनने के लिए क्या शर्तें हैं?
उत्तर: गूँज (Echo) – ध्वनि का परावर्तन होने पर जब ध्वनि वापस सुनाई देती है, तो उसे गूँज कहते हैं ।
- शर्तें:
- परावर्तक सतह और श्रोता के बीच की दूरी कम से कम 17.2 m होनी चाहिए ।
- ध्वनि स्रोत और परावर्तक सतह के बीच की दूरी 17.2 m से अधिक होनी चाहिए ।
कारण: मानव मस्तिष्क दो ध्वनियों के बीच 0.1 s का अंतर पहचान सकता है। 344 m/s (कमरे के तापमान पर ध्वनि की चाल) × 0.1 s = 34.4 m (आगे-पीछे) ⇒ 34.4/2 = 17.2 m
प्रश्न 3:
ध्वनि का परावर्तन किन-किन स्थानों पर उपयोगी है?
उत्तर: ध्वनि का परावर्तन उपयोगी है :
- सोनार (SONAR) – समुद्र की गहराई मापने तथा पानी के अंदर वस्तुओं का पता लगाने में ।
- स्टेथोस्कोप – शरीर के अंदर की ध्वनियाँ सुनने के लिए ।
- बड़े हॉल/सभागार – ध्वनि को एक समान वितरित करने के लिए (ध्वनि परावर्तक छत/दीवारें) ।
पेज 133 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
ध्वनि की चाल किन कारकों पर निर्भर करती है?
उत्तर: ध्वनि की चाल निम्न कारकों पर निर्भर करती है :
- माध्यम की प्रकृति: ठोस > द्रव > गैस (ध्वनि ठोस में सबसे तेज़ चलती है) ।
- तापमान: तापमान बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है ।
- आर्द्रता: आर्द्रता बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है (शुष्क वायु की तुलना में) ।
प्रश्न 2:
ध्वनि की चाल हवा में, पानी में और लोहे में कितनी होती है?
| माध्यम | ध्वनि की चाल (लगभग) |
| वायु (हवा) | 344 m/s (20°C पर) |
| जल (पानी) | 1500 m/s |
| लोहा (Iron) | 5130 m/s |
ध्वनि ठोस में सबसे तेज़, द्रव में मध्यम और गैस में सबसे धीमी गति से चलती है ।
अभ्यास (Exercises) – पाठ के अंत में दिए गए प्रश्न
प्रश्न 1:
ध्वनि कैसे उत्पन्न होती है?
उत्तर: ध्वनि कंपन (Vibration) द्वारा उत्पन्न होती है ।
- जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के माध्यम (हवा, पानी, आदि) के कणों को कंपन करने के लिए विवश करती है ।
- ये कंपन तरंगों के रूप में हमारे कानों तक पहुँचते हैं और हमें ध्वनि सुनाई देती है ।
प्रश्न 2:
ध्वनि संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर: ध्वनि कणों के कंपन द्वारा संचरित होती है। कणों के बिना (निर्वात में) कंपन का स्थानांतरण नहीं हो सकता, इसलिए ध्वनि को संचरण के लिए किसी माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) की आवश्यकता होती है ।
प्रश्न 3:
ध्वनि तरंगों में संपीडन और विरलन क्या हैं?
- संपीडन (Compression): वह क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण अत्यधिक पास-पास होते हैं – इस क्षेत्र में उच्च दाब होता है ।
- विरलन (Rarefaction): वह क्षेत्र जहाँ माध्यम के कण अत्यधिक दूर-दूर होते हैं – इस क्षेत्र में निम्न दाब होता है ।
ध्वनि तरंग संपीडन और विरलन के क्रमिक चक्रों से बनी होती है ।
प्रश्न 4:
ध्वनि की चाल और आवृत्ति में क्या संबंध है?
v = f × λ
जहाँ :
- v = ध्वनि की चाल
- f = आवृत्ति (Frequency) – प्रति सेकंड कंपनों की संख्या
- λ = तरंगदैर्घ्य (Wavelength) – दो क्रमिक संपीडनों/विरलनों के बीच की दूरी
प्रश्न 5:
एक ध्वनि तरंग की आवृत्ति 500 Hz और तरंगदैर्घ्य 0.68 m है। ध्वनि की चाल ज्ञात करें।
- f = 500 Hz
- λ = 0.68 m
- v = f × λ = 500 × 0.68 = 340 m/s
प्रश्न 6:
ध्वनि का परावर्तन क्या है? इसके दो व्यावहारिक उपयोग लिखें।
उत्तर: ध्वनि का परावर्तन – ध्वनि तरंगों का किसी कठोर सतह से टकराकर वापस लौटना ।
उपयोग:
- सोनार (SONAR) – समुद्र की गहराई मापने तथा पानी में वस्तुओं का पता लगाने के लिए ।
- स्टेथोस्कोप – शरीर के अंदर के अंगों की ध्वनियाँ (जैसे हृदय की धड़कन) सुनने के लिए ।
प्रश्न 7:
किसी कमरे में ध्वनि परावर्तन को कम करने के लिए क्या किया जाता है?
उत्तर: ध्वनि परावर्तन को कम करने के लिए ध्वनि अवशोषक पदार्थों का उपयोग किया जाता है ।
- छत/दीवारों पर फाइबर बोर्ड, खुरदुरे प्लास्टर, कार्पेट, पर्दे आदि लगाए जाते हैं ।
- इनसे ध्वनि अवशोषित हो जाती है और गूँज (Echo) कम हो जाती है ।
प्रश्न 8:
एक व्यक्ति 100 m दूर खड़ी चट्टान के पास ताली बजाता है। उसे गूँज कब सुनाई देगी? (ध्वनि की चाल = 340 m/s)
- दूरी (d) = 100 m
- v = 340 m/s
- ध्वनि को चट्टान तक जाने और वापस आने में लगा समय = 2d/v
- t = 2 × 100 / 340 = 200/340 = 0.59 s
व्यक्ति को 0.59 सेकंड बाद गूँज सुनाई देगी ।