पेज 146 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
फसलों की किस्मों में सुधार से क्या लाभ हैं?
उत्तर: फसलों की किस्मों में सुधार से निम्न लाभ होते हैं [citation:2]:
- अधिक उपज (High yield) – बेहतर किस्मों से उत्पादन बढ़ता है ।
- बेहतर गुणवत्ता (Improved quality) – फसलों की गुणवत्ता में सुधार होता है ।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता – रोगों और कीटों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है ।
- जलवायु अनुकूलन – विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उगने की क्षमता ।
- कम समय में पकने वाली किस्में – जल्दी पकने से अधिक फसल ली जा सकती है ।
प्रश्न 2:
फसल उत्पादन के प्रबंधन में कौन-से चरण शामिल हैं?
उत्तर: फसल उत्पादन प्रबंधन में निम्न चरण शामिल हैं [citation:7]:
- पोषण प्रबंधन (Nutrition Management) – उर्वरकों एवं खादों का उपयोग [citation:2]।
- सिंचाई प्रबंधन (Irrigation Management) – फसलों को समय पर पानी उपलब्ध कराना ।
- फसल संरक्षण प्रबंधन (Crop Protection Management) – खरपतवार, कीट एवं रोगों से फसलों की सुरक्षा [citation:7]।
- भंडारण प्रबंधन (Storage Management) – फसलों की कटाई के बाद सुरक्षित भंडारण ।
पेज 149 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
खाद एवं उर्वरक में अंतर बताएँ।
| खाद (Manure) | उर्वरक (Fertilizer) |
| प्राकृतिक रूप से बनता है [citation:1]। | कृत्रिम रूप से कारखानों में बनाया जाता है [citation:10]। |
| इसमें कार्बनिक पदार्थ अधिक एवं पोषक तत्व कम होते हैं [citation:1]। | इसमें पोषक तत्व अधिक एवं कार्बनिक पदार्थ कम होते हैं [citation:1]। |
| मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाता है [citation:1]। | मिट्टी की जल धारण क्षमता पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता । |
| मिट्टी को दीर्घकालिक लाभ देता है । | तत्काल पोषण देता है, परंतु अत्यधिक उपयोग हानिकारक है [citation:10]। |
| पर्यावरण के अनुकूल (eco-friendly) है [citation:1]। | अत्यधिक उपयोग से मृदा एवं जल प्रदूषण होता है [citation:10]। |
प्रश्न 2:
फसलों की उपज बढ़ाने के लिए कौन-सी विधियाँ अपनाई जाती हैं?
उत्तर: फसलों की उपज बढ़ाने के लिए निम्न विधियाँ अपनाई जाती हैं [citation:10]:
- मिश्रित खेती (Mixed Cropping) – एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलें एक साथ उगाना [citation:10]।
- अंतर-फसली (Inter-cropping) – एक ही खेत में निश्चित पैटर्न में दो फसलें उगाना [citation:10]।
- फसल चक्र (Crop Rotation) – एक ही भूमि पर विभिन्न फसलों को क्रमबद्ध रूप से उगाना [citation:10]।
- उन्नत बीजों का उपयोग [citation:12]।
- उचित सिंचाई एवं उर्वरकों का संतुलित उपयोग [citation:12]।
अभ्यास (Exercises) – पाठ के अंत में दिए गए प्रश्न
प्रश्न 1:
हरित क्रांति और श्वेत क्रांति क्या हैं?
उत्तर: [citation:1][citation:3]
- हरित क्रांति (Green Revolution) – भारत में खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ाने के लिए 1960 के दशक में शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य गेहूँ और चावल के उत्पादन में वृद्धि करना था ।
- श्वेत क्रांति (White Revolution) – दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। इसे ऑपरेशन फ्लड भी कहा जाता है [citation:1]।
प्रश्न 2:
फसलों की किस्मों में सुधार के लिए कौन-से तरीके अपनाए जाते हैं?
उत्तर: फसलों की किस्मों में सुधार के तरीके [citation:7]:
- संकरण (Hybridisation) – दो भिन्न किस्मों/प्रजातियों के बीच क्रॉस करना [citation:9]।
- आनुवंशिक संशोधन (Genetic Modification) – वांछित जीनों को पौधों में स्थानांतरित करना [citation:9]।
- चयन (Selection) – अच्छी किस्मों का चयन एवं संरक्षण ।
GM फसल (GM Crop) – वे फसलें जिनमें वांछित विशेषता वाले जीन डाले जाते हैं, जैसे – Bt कपास [citation:9]।
प्रश्न 3:
खाद क्या है? इसके प्रकार बताएँ।
उत्तर: खाद (Manure) – पशु अपशिष्ट, पौधों के अवशेष एवं जैविक पदार्थों के अपघटन से प्राप्त कार्बनिक पदार्थ है [citation:10][citation:1]।
प्रकार: [citation:10]
- कम्पोस्ट (Compost) – खेत/रसोई अपशिष्ट को गड्ढे में सड़ाकर बनाया जाता है ।
- वर्मी-कम्पोस्ट (Vermi-compost) – केंचुओं द्वारा जैविक पदार्थों का अपघटन [citation:10]।
- हरी खाद (Green Manure) – हरी फसलों (जैसे – ढैंचा, ग्वार) को जोतकर मिट्टी में मिलाना [citation:10]।
प्रश्न 4:
उर्वरक क्या है? अत्यधिक उर्वरक उपयोग क्यों हानिकारक है?
उत्तर: उर्वरक (Fertilizer) – कारखानों में कृत्रिम रूप से निर्मित रासायनिक पदार्थ, जो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व (N, P, K) प्रदान करते हैं [citation:10]।
अत्यधिक उपयोग हानिकारक क्यों है? [citation:10]
- मृदा एवं जल प्रदूषण का कारण बनता है ।
- मिट्टी की उर्वरता नष्ट होती है ।
- मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुँचता है ।
लोहा (Iron) उर्वरकों में उपलब्ध नहीं है – यह पौधों को मिट्टी से प्राप्त होता है [citation:1]।
प्रश्न 5:
जैविक खेती (Organic Farming) क्या है?
उत्तर: जैविक खेती – बिना रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों एवं शाकनाशियों के खेती करना [citation:11][citation:6]।
- इसमें खाद, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक का उपयोग किया जाता है [citation:6]।
- यह पर्यावरण के अनुकूल एवं स्वास्थ्यवर्धक है [citation:11]।
- जैविक खाद्य पदार्थों में रासायनिक अवशेष नहीं होते [citation:11]।
प्रश्न 6:
पशुपालन (Animal Husbandry) क्या है?
उत्तर: पशुपालन (Animal Husbandry) – पशुओं का वैज्ञानिक प्रबंधन, जिसमें प्रजनन, पालन-पोषण एवं रोग नियंत्रण शामिल है [citation:6]।
इसके अंतर्गत आते हैं [citation:6][citation:7]:
- पशुधन (Cattle Farming) – दूध, मांस एवं कृषि कार्य के लिए [citation:1]।
- कुक्कुट पालन (Poultry Farming) – अंडे एवं चिकन मांस के लिए [citation:1]।
- मत्स्य पालन (Fish Production) – मछली उत्पादन के लिए ।
- मधुमक्खी पालन (Bee-keeping) – शहद एवं मोम के लिए ।
प्रश्न 7:
भंडारण के दौरान अनाज की हानि के कारण क्या हैं?
उत्तर: भंडारण के दौरान अनाज की हानि के कारण [citation:12]:
- जैविक कारक: कीड़े, कृंतक (चूहे), कवक, जीवाणु, माइट्स [citation:12]।
- अजैविक कारक: अनुचित नमी, तापमान, आर्द्रता [citation:12]।
रोकथाम के उपाय [citation:1]:
- सख्त सफाई (Strict cleaning)
- उचित सुखाना (Proper drying)
- धूमन (Fumigation) [citation:1]