पेज 53 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
केनाल किरणें क्या हैं?
उत्तर: एनोड से उत्पन्न होने वाली धनावेशित किरणों को केनाल किरणें कहा जाता है। इनकी खोज 1886 में ई. गोल्डस्टीन ने की थी [citation:3][citation:6]।
ये किरणें धनावेशित विकिरण थीं, जिसके द्वारा अंततः दूसरे अवपरमाणुक कण (प्रोटॉन) की खोज हुई।
प्रश्न 2:
यदि किसी परमाणु में एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन है, तो इसमें कोई आवेश होगा या नहीं?
उत्तर: नहीं, इसमें कोई आवेश नहीं होगा, क्योंकि:
- इलेक्ट्रॉन पर -1 आवेश होता है।
- प्रोटॉन पर +1 आवेश होता है।
- दोनों आवेश एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं, अतः परमाणु उदासीन होगा [citation:3][citation:6]।
पेज 56 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
परमाणु उदासीन है, इस तथ्य को टॉमसन के मॉडल के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: टॉमसन के परमाणु मॉडल (जिसे प्लम पुडिंग मॉडल भी कहा जाता है) के अनुसार [citation:3][citation:6]:
- परमाणु एक धनावेशित गोला होता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन धसे हुए होते हैं (जैसे केक में किशमिश)।
- धनात्मक और ऋणात्मक आवेश परिमाण में बराबर होते हैं, जो एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं [citation:3]।
इसलिए परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन (Neutral) होता है।
प्रश्न 2:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु के नाभिक में कौन सा अवपरमाणुक कण विद्यमान है?
उत्तर: रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के अनुसार, परमाणु के नाभिक में प्रोटॉन विद्यमान होता है [citation:3][citation:6]।
इसके अलावा, रदरफोर्ड के अनुसार परमाणु का अधिकांश भाग खाली स्थान होता है और नाभिक अत्यंत छोटा, घना एवं धनावेशित होता है [citation:6]।
प्रश्न 3:
तीन कक्षाओं वाले बोर के परमाणु मॉडल का चित्र बनाइए।
उत्तर: बोर के परमाणु मॉडल में [citation:2][citation:6]:
- नाभिक केंद्र में होता है (धनावेशित)।
- इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं (K, L, M, N) में चक्कर लगाते हैं।
- प्रत्येक कक्षा में निश्चित ऊर्जा होती है और इलेक्ट्रॉन इन कक्षाओं में ऊर्जा का विकिरण नहीं करते [citation:2]।
चित्र (स्वयं बनाएँ): केंद्र में नाभिक (⊕) तथा उसके चारों ओर तीन वृत्ताकार कक्षाएँ (K, L, M) बनाएँ और उन पर इलेक्ट्रॉन (⊙) अंकित करें [citation:3]।
प्रश्न 4:
क्या अल्फ़ा कणों का प्रकीर्णन प्रयोग सोने के अतिरिक्त दूसरी धातु की पन्नी से संभव होगा?
उत्तर: हाँ, यह प्रयोग अन्य धातुओं की पन्नी से भी संभव है, क्योंकि सभी परमाणुओं की संरचना मूलतः एक समान होती है [citation:3][citation:6]।
- सोने की पन्नी इसलिए चुनी गई क्योंकि इसे बहुत पतला (लगभग 1000 परमाणु मोटा) बनाया जा सकता था [citation:3]।
- अन्य धातुओं में भी प्रकीर्णन होगा, परंतु डिग्री (परिमाण) भिन्न हो सकती है [citation:6]।
पेज 58 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
परमाणु के तीन अवपरमाणुक कणों के नाम लिखें।
उत्तर: परमाणु के तीन अवपरमाणुक कण हैं [citation:3][citation:6]:
- प्रोटॉन (Proton) – धनावेशित
- इलेक्ट्रॉन (Electron) – ऋणावेशित
- न्यूट्रॉन (Neutron) – उदासीन (कोई आवेश नहीं)
प्रश्न 2:
हीलियम परमाणु का परमाणु द्रव्यमान 4 u है और उसके नाभिक में दो प्रोटॉन हैं। इसमें कितने न्यूट्रॉन होंगे?
उत्तर:
- परमाणु द्रव्यमान = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
- 4 = 2 + न्यूट्रॉनों की संख्या
- न्यूट्रॉनों की संख्या = 4 – 2 = 2
∴ हीलियम परमाणु में 2 न्यूट्रॉन होंगे। [citation:3][citation:6]
पेज 59 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
क्लोरीन, सल्फर और मैग्नीशियम की परमाणु संख्या से आप इसकी संयोजकता कैसे प्राप्त करेंगे?
उत्तर: किसी परमाणु की संयोजकता उसके बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। यह वह संख्या है जो अष्टक (8) पूर्ण करने के लिए आवश्यक होती है [citation:1][citation:2]।
| तत्व | परमाणु संख्या | इलेक्ट्रॉन वितरण (K, L, M) | संयोजकता |
| क्लोरीन (Cl) | 17 | 2, 8, 7 | 8 – 7 = 1 |
| सल्फर (S) | 16 | 2, 8, 6 | 8 – 6 = 2 |
| मैग्नीशियम (Mg) | 12 | 2, 8, 2 | 2 (2 इलेक्ट्रॉन त्यागता है) [citation:1] |
प्रश्न 2:
यदि किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 8 है और प्रोटॉनों की संख्या भी 8 है तब, (a) परमाणु की परमाणुक संख्या क्या है? (b) परमाणु का क्या आवेश है?
उत्तर:
- (a) परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या = 8 [citation:1][citation:2]
- (b) परमाणु का आवेश: प्रोटॉन (+8) तथा इलेक्ट्रॉन (-8) एक-दूसरे को निरस्त करते हैं, अतः आवेश = 0 (परमाणु उदासीन है) [citation:1]।
पेज 60 – इनटेक्स्ट प्रश्न
प्रश्न 1:
सारणी 4.1 की सहायता से ऑक्सीजन और सल्फर-परमाणु की द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर: द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या [citation:1][citation:2]।
- ऑक्सीजन: प्रोटॉन = 8, न्यूट्रॉन = 8 ⇒ द्रव्यमान संख्या = 8 + 8 = 16 u [citation:1]
- सल्फर: प्रोटॉन = 16, न्यूट्रॉन = 16 ⇒ द्रव्यमान संख्या = 16 + 16 = 32 u [citation:1]
प्रश्न 2:
चिह्न H, D और T के लिए प्रत्येक में पाए जाने वाले तीन अवपरमाणुक कणों को सारणीबद्ध कीजिए।
उत्तर: H, D और T हाइड्रोजन के समस्थानिक (Isotopes) हैं [citation:1][citation:2]।
| चिह्न | नाम | प्रोटॉन (p) | न्यूट्रॉन (n) | इलेक्ट्रॉन (e⁻) |
| H | प्रोटियम | 1 | 0 | 1 |
| D | ड्यूटीरियम | 1 | 1 | 1 |
| T | ट्राइटियम | 1 | 2 | 1 |
प्रश्न 3:
समस्थानिक और समभारिक के किसी एक युग्म का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए।
उत्तर:
- समस्थानिक (Isotopes): एक ही तत्व के परमाणु, जिनमें प्रोटॉनों की संख्या समान लेकिन न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होती है [citation:2][citation:4]।
उदाहरण: 12C (6p, 6n) और 14C (6p, 8n) – दोनों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 होगा (क्योंकि दोनों कार्बन हैं) [citation:2]।
- समभारिक (Isobars): विभिन्न तत्वों के परमाणु, जिनकी द्रव्यमान संख्या समान लेकिन परमाणु संख्या भिन्न होती है [citation:2][citation:4]।
उदाहरण: 40Ca (20p, 20n) और 40Ar (18p, 22n) –
Ca का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 8, 2
Ar का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 8 [citation:2]।
अभ्यास (Exercises) – पाठ के अंत में दिए गए प्रश्न
प्रश्न 1:
किसी तत्व के परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या 8 तथा न्यूट्रॉनों की संख्या 10 है। इसकी परमाणु संख्या एवं द्रव्यमान संख्या ज्ञात कीजिए।
- परमाणु संख्या = प्रोटॉनों की संख्या = 8
- द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = 8 + 10 = 18 u
प्रश्न 2:
टॉमसन के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर: टॉमसन के मॉडल की मुख्य सीमाएँ [citation:3][citation:6]:
- यह परमाणु के नाभिक की व्याख्या नहीं कर सका (रदरफोर्ड ने बाद में नाभिक की खोज की)।
- इलेक्ट्रॉनों की कक्षीय गति की व्याख्या नहीं कर सका।
- अल्फा-कण प्रकीर्णन प्रयोग के परिणामों की व्याख्या नहीं कर सका [citation:8]।
प्रश्न 3:
रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की क्या सीमाएँ हैं?
उत्तर: रदरफोर्ड के मॉडल की सीमाएँ [citation:2][citation:8]:
- यह परमाणु की स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका – गतिमान इलेक्ट्रॉनों को ऊर्जा विकीर्ण कर नाभिक में गिर जाना चाहिए था।
- इलेक्ट्रॉनों की कक्षा (Orbits) के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।
- यह किसी तत्व के स्पेक्ट्रम (वर्णक्रम) की व्याख्या नहीं कर सका [citation:8]।
बोर ने बाद में यह सीमा दूर की, जब उन्होंने निश्चित ऊर्जा-स्तरों वाली कक्षाएँ प्रस्तावित कीं [citation:2][citation:8]।
प्रश्न 4:
बोर के परमाणु मॉडल की मान्यताएँ लिखिए।
उत्तर: बोर के परमाणु मॉडल की प्रमुख मान्यताएँ [citation:2][citation:6]:
- परमाणु के केंद्र में धनावेशित नाभिक होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं (K, L, M, N) में चक्कर लगाते हैं।
- प्रत्येक कक्षा में निश्चित ऊर्जा होती है, इसलिए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते।
- जब इलेक्ट्रॉन निचली से उच्च कक्षा में जाता है तो ऊर्जा अवशोषित करता है, और उच्च से निचली कक्षा में आने पर ऊर्जा उत्सर्जित करता है [citation:6]।
प्रश्न 5:
निम्नलिखित के इलेक्ट्रॉन-वितरण लिखिए: (i) सोडियम (Na) (ii) क्लोरीन (Cl) (iii) ऑक्सीजन (O) (iv) नाइट्रोजन (N)
उत्तर: [citation:1][citation:2]
- (i) Na (Z=11): K=2, L=8, M=1 ⇒ 2, 8, 1
- (ii) Cl (Z=17): K=2, L=8, M=7 ⇒ 2, 8, 7
- (iii) O (Z=8): K=2, L=6 ⇒ 2, 6
- (iv) N (Z=7): K=2, L=5 ⇒ 2, 5
प्रश्न 6:
निम्नलिखित तत्वों की संयोजकता ज्ञात कीजिए: (i) Na (ii) Cl (iii) O (iv) N
उत्तर: [citation:1][citation:2]
- Na (2, 8, 1): 1 इलेक्ट्रॉन त्यागता है ⇒ संयोजकता = 1
- Cl (2, 8, 7): 7 – 8 = संयोजकता = 1
- O (2, 6): 8 – 6 = संयोजकता = 2
- N (2, 5): 8 – 5 = संयोजकता = 3
प्रश्न 7:
Na⁺ आयन में पूर्णतया भरे हुए K और L कोश हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: [citation:2][citation:4]
- Na (Z=11): इलेक्ट्रॉन वितरण = 2, 8, 1
- Na, 1 इलेक्ट्रॉन त्यागकर Na⁺ बनाता है।
- Na⁺ में इलेक्ट्रॉन = 10, वितरण = K=2, L=8
इस प्रकार Na⁺ में K और L कोश पूर्णतः भरे हुए हैं (K=2, L=8) – अक्रिय गैस विन्यास [citation:2][citation:4]।
प्रश्न 8:
यदि ब्रोमीन परमाणु दो समस्थानिकों 79Br (49.7%) तथा 81Br (50.3%) के रूप में उपलब्ध है, तो ब्रोमीन परमाणु के औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना कीजिए।
उत्तर: [citation:4]
- औसत परमाणु द्रव्यमान = (प्रतिशतता₁ × द्रव्यमान₁ + प्रतिशतता₂ × द्रव्यमान₂) / 100
- = (49.7 × 79 + 50.3 × 81) / 100
- = (3926.3 + 4074.3) / 100 = 8000.6 / 100 = 80.006 u ≈ 80.0 u
∴ ब्रोमीन का औसत परमाणु द्रव्यमान ≈ 80.0 u है। [citation:4]
प्रश्न 9:
एक तत्व X के नमूने का औसत परमाणु द्रव्यमान 16.2 u है। इस नमूने में समस्थानिक 16X और 18X के प्रतिशत क्या हैं?
उत्तर:
- माना 16X का प्रतिशत = a तथा 18X का प्रतिशत = (100 – a)
- औसत द्रव्यमान = a×16/100 + (100–a)×18/100 = 16.2
- 16a + 1800 – 18a = 1620
- -2a = -180 ⇒ a = 90
- 16X = 90%, 18X = 10%
उत्तर: 16X = 90%, 18X = 10%